पितृपक्ष के इस महीने में पूर्वजों को याद किया जाता है। पितृ यानी पूर्वज जिनका देहांत हो गया है। हिन्दू धर्म में पितरों को याद कर उनसे आशीर्वाद लेने की रीति है। श्राद्ध में कई नियम करने होते हैं। इन नियमों के अनुसार पितरों को याद किया जाता है और उनसे अपने कुल परिवार के लिए आशीर्वाद मांगा जाता है। पितृपक्ष के इस महीने में शादी – विवाह नहीं होते, सोना-चांदी नहीं खरीदा जाता इस दौरान केवल पितरों को पूजा जाता है।
लोग अपने पूर्वजों के लिए उनके पसंद के भोजन बना कर उनकी तिथि पर उन्हें अर्पित करते हैं । कुत्ते या कौवे अगर ये भोजन खा लें तो ये माना जाता है कि पितरों ने भोजन खा लिया है और ये शुभ होता है। श्राद्ध के दिनों में कौवे का भोजन ग्रहण करना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि स्वयं पितरों ने भोजन ग्रहण किया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कौवे का भोजन खाना इतना जरूरी क्यों है। आईए जानते हैं इसके पीछे की कहानी क्या है ?
क्या है कहानी
हमने अक्सर ऐसा देखा है कि कौवे का श्राद्ध के दिनों में पितरों को चढ़ाया हुआ भोजन खाना कितना शुभ माना जाता है। कौवे ने खाया यानी पितरों ने खाया। लेकिन श्राद्ध में कौवे का इतना महत्व क्यों है ये सवाल हमारे मन में आता ज़रूर है तो चलिए जानते हैं इसके पीछे का कारण । एक दिन श्री राम और देवी सीता वन में घूम रहे थे । तभी देवराज इन्द्र के पुत्र जयंत ने श्री राम की शक्ति को परखना चाहा और कौवे का रूप धारण कर लिया और फिर उसने माता सीता के पैर में चोंच मारकर उन्हें घायल कर दिया । श्री राम ने कौवे को बाण मारा और जयंत अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर घूमने लगा।
इंद्रदेव ने भी नहीं की जयंत की सहायता
जयंत अपने असली रूप को धारण कर अपने पिता इंद्रदेव के पास गया और इन्द्र से सहायता मांगने लगा । इन्द्र ने सहायता करने से मना कर दिया। तब नारद ने जयंत को कहा कि तुम्हें केवल श्री राम ही बचा सकते हैं । जयंत श्री राम की शरण में जाकर उनसे क्षमा माँगता है। उन्होंने जयंत को क्षमा कर दिया लेकिन उनके बाण ने जयंत की एक आँख फोड़ दी क्योंकि राम द्वारा छोड़ा गया बाण निष्फल नहीं जाता है। उसी दिन से कौवों को एक आँख का माना जाता है।
श्री राम ने दिया जयंत को ये आशीर्वाद
जयंत ने प्रभु श्री राम से आशीर्वाद मांगा कि लोग मुझसे घृणा न करें बल्कि मेरा सत्कार करें । तब प्रभु राम ने कहा कि पृथ्वी पर पितृपक्ष में कौवे को भोजन खिलाने का बहुत महत्व होगा। कौवे को अर्पित किया हुआ भोजन पितरों को प्राप्त होगा। तभी से कौवे को भोजन कराने की परंपरा चली आ रही है। लोग अपने पितरों को श्रद्धा पूर्वक भोजन अर्पित करते हैं। पितृ अपने बच्चों से बहुत अत्यधिक कुछ नहीं चाहते वो तो केवल श्रद्धा चाहते हैं तभी कहा भी गया है कि श्रद्धा बिना श्राद्ध अधूरा है।
इसके बाद से श्राद्ध में कौवे को भोजन कराना शुभ माना जाने लगा। कौवे , कुत्ते , गाय और चींटियों को भोजन खिलाना शुभ होता है । ऐसा माना जाता है कि पितृ इनके रूप में आकर अपने परिवार के सारे दुख कष्ट दूर करते हैं । यही कारण है कि श्राद्ध के इस महीने में केवल पितृ पूजे जाते हैं।
