33.1 C
New Delhi
May 11, 2026
भारत

कश्मीर विलय की दास्तां: वो सच जो कम लोग जानते हैं!

Kashmir vilay

देश के विभाजन में रियासतों के विलय का इतिहास बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर ये रियासतें आज देश का हिस्सा नहीं होती तो भारत अखंड नहीं बल्कि टुकड़ों में दिखता। इनमें भी जम्मू-कश्मीर एक ऐसा राज्य है जहां अभी तक शांति स्थापित नहीं की जा सकी, भले ही यह भारत का अभिन्न हिस्सा हो। जम्मू कश्मीर के भारत में विलय को लेकर कहानी तो लगभग सभी जानते हैं पर इस कहानी में ऐसा बहुत कुछ है जो जानने काबिल है। चलिए आज़ादी के इस उपलक्ष्य में कश्मीर विलय को लेकर थोड़ा विस्तार से बात करें।

देश का विभाजन और कश्मीर रियासत

देश के विभाजन की स्मृतियां काफी दर्दनाक हैं, किसी अपने को खोना, परिवार से बिछड़ जाना, दूसरे देश में भी मेहमानों सा बर्ताव, अत्याचार, दुर्व्यवहार और धर्म के नाम पर हुए दंगों ने यह साबित कर दिया था कि धर्म और ज़मीन की इस जंग में रिश्तों की हत्या कर दी जाएगी।

जवाहर लाल नेहरू ने आज़ादी की मध्यरात्रि 14 अगस्त 1947 को संविधान सभा में सभी को संबोधित करते हुए यह कह तो दिया कि “भाग्यवधू से चिर-प्रतिक्षित भेंट” पर रियासतों के विलय की चिंता अभी भी बनी हुई थी। कश्मीर के महाराजा हरिसिंह अभी तक यह निर्णय नहीं ले पाए थे कि भारत या पाकिस्तान में से किसी एक में विलय करना चाहते हैं या स्वतंत्र राज्य की स्थापना। फिर शेख़ अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस का वहां सक्रिय होना यह इशारा कर रहा था कि भारत का पलड़ा भारी है।

यहां यह बात ध्यान देने योग्य है कि कश्मीर की आधी से ज्यादा आबादी मुस्लिम थी जबकि महाराजा हरिसिंह हिन्दू। यही द्वंद इस मसले को विवादास्पद बनाता चलाया गया। हालांकि, कई संकेतों से यह पता चल चुका था कि महाराजा भारत के साथ विलय की तैयारी में है।

पाकिस्तान द्वारा कबायली हमला

इसपर पाकिस्तान ने 22 अक्टूबर 1947 को कबायली हमला करवा दिया। इन कबायलियों ने धर्म को अनदेखा करते हुए हिन्दू-मुस्लिम सभी की हत्या और लूटपाट की। जैसे-जैसे श्रीनगर की तरफ ये बढ़ते गए महाराजा का फैसला दृढ़ होता गया।

25 अक्टूबर को महाराजा शहर छोड़कर भाग गए और जम्मू के सुरक्षित महल पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने भारत से मदद की गुहार लगाई। मन में मदद न मिलने के डर के चलते उन्होंने अपने एडीसी कैप्टन दीवान सिंह से यह तक कह दिया था कि ‘ अगर अगली सुबह कश्मीर में भारतीय वायुसेना के विमान नज़र न आए तो मुझे नींद में ही गोली मार देना!’

आधिकारिक रूप से यह कहा जाता है कि 26 अक्टूबर को वीपी मेनन ने महाराजा से इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेसेशन पर हस्ताक्षर करवा लिए थे जिसके बाद कश्मीर को भारत की सैन्य मदद मिली। कुछ इस तरह जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा बना।

जम्मू-कश्मीर : हिंदू-मुस्लिम एकता का उदाहरण

देशभर में विभाजन की वजह से सांप्रदायिक तनाव बना हुआ था उससे जम्मू कश्मीर भला कैसे अछूता रह सकता है? पर आपको यह जानकार हैरानी होगी कि शेख अब्दुल्ला के प्रभाव वाले क्षेत्र में जहां नैशनल कॉन्फ्रेंस धर्मनिरपेक्षता का पाठ पढ़ाने में जुटी हुई थी, सांप्रदायिक हिंसा या दंगों से जुड़ी कोई घटना नहीं देखी गई। इसके अलावा, वहां से न ही कोई मुस्लिम नागरिक पाकिस्तान गए और न ही वहां रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदुओं और सिक्खों को निकाला गया।

आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!

Related posts

चुनाव आयोग पर लगे आरोप अगर हुए साबित तो लिए जा सकते हैं ये 3 एक्शन

Shweta Chauhan

Stray Dog: आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला, बॉलीवुड में हुई हलचल

Srishti Mishra

Independence Day:राजनीति को आईना दिखाती हैं रफ़ीक़ शादानी की 3 कविताएं

Srishti Mishra

1 comment

Divya rawat August 15, 2025 at 4:05 AM

Well written 👏

Reply

Leave a Comment