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March 2, 2026
धर्ममंदिर दर्शन

भारत के वो 3 मंदिर जहां पीरियड्स के दौरान भी जा सकती हैं महिलाएं

women’s entry in temples

सनातन धर्म में माहवारी के समय महिलाओं का पूजा पाठ करना वर्जित है, यह रीति अब रूढ़ि हो चुकी है इसलिए इसे मानना अनिवार्य है। खैर, हम धर्म के मुद्दे पर बात नहीं करेंगे, पर क्या आप जानते हैं कि ऐसे बहुत से मंदिर हैं जहां पीरियड्स के दौरान भी महिलाएं जा सकती हैं और पूजा पाठ भी कर सकती हैं? मंदिर दर्शन में आज इन सभी मंदिरों के बारे में जानेंगे जिनकी जानकारी बहुत कम लोगों को है ।

कामख्या मंदिर, असम

असम की राजधानी दिसपुर से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर कामाख्या मंदिर स्थित है। आदि शक्ति के 51 शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर तंत्र मंत्र की साधना के लिए प्रसिद्ध है। यहां महिलाएं पीरियड्स के दौरान भी जा सकती हैं। यहां देवी मां का मासिक धर्म भी तीन दिन तक चलता है जिसे पवित्र माना गया है।

कामख्या मंदिर की कहानी

ऐसी मान्यता है कि यह मंदिर माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस सिद्धपीठ में माता सती की योनि का पूजन होता है। बिना किसी तस्वीर या मूर्ति के माता की पूजा की जाती है। 22 जून से 25 जून तक माता सती रजस्‍वला रहती हैं इसलिए तीन दिन यह मंदिर बंद रहता है।

आदि पराशक्ति मंदिर, तमिलनाडु

यह मंदिर महिलाओं की माहवारी को अपवित्र नहीं मानता है। यहां दशकों से बिना किसी रोक टोक के महिलाएं पीरियड्स के दौरान भी पूजा करती आ रही हैं। सबसे खास बात यह कि इस मंदिर में कोई पुजारी नहीं है और महिलाएं पुरुषों की तरह गर्भ गृह में प्रवेश कर ईश्वर की आराधना कर सकती हैं।

आदि पराशक्ति मंदिर की कहानी

ऐसी मान्यता है कि आज से कुछ दशक पहले चेन्नई-विल्लुपुरम नेशनल हाइवे पर बसे मरुवथूर गांव में किसी स्कूल के टीचर ने दावा किया कि यहां नीम के पेड़ से दूध निकल रहा था।
इस दावे के कुछ दिनों बाद तेज़ आंधी के चलते वह पेड़ गिर गया। उस टीचर ने फिर से दावा किया कि वहां स्वयंभू लिंग अवतरित हुआ और उन्होंने खुद को शक्ति भी कहा। इसके बाद उस पेड़ के स्थान पर ही आदि पराशक्ति मंदिर का निर्माण करवाया था।

लिंग भैरवी मंदिर, तमिलनाडु

तमिलनाडु के कोयंबटूर में स्थित मां लिंग भैरवी मंदिर में महिलाएं पीरियड्स के दौरान भी प्रवेश कर सकती हैं। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पुजारी महिलाएं हैं और केवल उन्हें ही गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति भी है। इन पुजारी महिलाओं को भैरागिनी मां के नाम से पुकारा जाता है।

लिंग भैरवी मंदिर की कहानी

इस मंदिर की कोई पौराणिक कहानी नहीं है क्योंकि यह मंदिर ईशा योग केंद्र द्वारा स्थापित किया गया है। एक जीवंत दिव्य ऊर्जा का अनुभव करने के लिए यहां जाया जा सकता है।

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