लद्दाख से संबंध रखने वाले मशहूर इंजीनियर, शिक्षाविद और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक जिन्हें थ्री इडियट्स फिल्म के बाद देश दुनिया में लोकप्रियता मिली, इन दिनों नकारात्मक कारणों से सुर्खियों में बने हुए हैं। सोशल मीडिया भी दो खेमों में बंट गया है, एक वह जो सोनम वांगचुक को आतंकवादी घोषित करने पर तुला है और दूसरा वो खेमा जिसने सोनम वांगचुक को एक सच्चा देशभक्त बताया है।
सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी क्यों हुई?
दरअसल इस पूरे मामले की शुरुआत हुई लद्दाख में प्रदर्शन से जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप धारण कर लिया और इसमें 4 लोग मारे गए, करीब 90 से ज्यादा लोग घायल भी हुए। कड़ी कार्रवाई करते हुए सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया गया और आरोप यह लगा है कि उनकी गतिविधियां लद्दाख क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन गई थीं।
सोनम वांगचुक पर गंभीर आरोप
लद्दाख प्रशासन का तो यह भी मानना है कि सोनम की मंशा संदिग्ध थी क्योंकि उन्होंने सरकार से बातचीत के प्रस्ताव को ठुकराकर अपना अनशन जारी रखा। इसके अलावा, यह भी आरोप है कि सोनम ने अपने भाषणों में नेपाल विद्रोह, अरब क्रांति और भ्रामक वीडियो के माध्यम से लोगों को भड़काने की कोशिश भी की है।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी
इसी कारण लद्दाख क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए सोनम को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर स्थानांतरित कर दिया गया है। चलिए अब बात करते हैं राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की, जो इन दिनों खबरों में खूब बना हुआ है।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 (National Security Act 1980)
इसके नाम से ही स्पष्ट है कि वह एक्ट जिसमें देश की सुरक्षा को ध्यान में रखा जाए। इस तरह इस अधिनियम के तहत केंद्र या राज्य सरकार को यह अधिकार है कि यदि क्षेत्र की शांति और सुरक्षा खतरे में है तो व्यक्ति की गिरफ्तारी की जा सकती है। इसके अनुसार, सरकार या जिला मजिस्ट्रेट/पुलिस आयुक्त किसी व्यक्ति को शक के आधार पर 12 महीने तक हिरासत में रख सकते हैं।
ध्यान रहे यह एक निवारक निरोध (Preventive Detention) कानून है जिसका मतलब है कि भविष्य में किसी व्यक्ति को अपराध करने से रोकने या किसी अभियोजन से बचने के लिए हिरासत में लेना।
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का मौलिक अधिकार से नाता
वैसे तो मौलिक अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं पर अगर बात राज्य की सुरक्षा और व्यवस्था (Law and Order) पर आ जाए तो संविधान के अनुच्छेद 22 (3) (b) में यह प्रावधान है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
अनुच्छेद 22(4) में यह प्रावधान है कि यदि किसी व्यक्ति को निवारक निरोध (Preventive Detention) के तहत गिरफ्तार किया गया है तो सलाहकार बोर्ड की अनुमति के बिना 3 महीने से अधिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। यह भी जान लें कि संसद कानून बनाकर यह अवधि बढ़ा सकती है।