11 august, 2025: कजरी तीज का त्यौहार विवाहित महिलाएं मनाती हैं। सावन के महीने एक ये त्यौहार प्रकृति में बदलाव और दाम्पत्य सुख को दर्शाता है। कजरी तीज , हिरयाली तीज के लगभग 15 दिन बाद मनाई जाती है। इसे बड़ी तीज भी कहा जाता है। इसे कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाता है। कजरी तीज का ये त्यौहार दाम्पत्य जीवन और भक्ति को जोड़ने वाला त्यौहार है। ये त्यौहार स्त्रियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष कजरी तीज मंगलवार 12 अगस्त 2025 में मनाई जाएगी। कजरी तीज में झूले झूलती महिलाएं लोकगीत गाती हैं। इस दौरान प्रकृति की हरियाली सब ओर फैली रहती है प्रकृति के इसी सौंदर्य को कजरी तीज में वरीयता दी गयी है। कजरी तीज से सम्बंधित व्रत कथा का स्त्रियां श्रद्धा भाव से पाठ करती हैं। तो चलिए जानते हैं कजरी तीज की व्रत कथा के बारे में।
जानिए कजरी तीज की कथा
ये कथा एक निर्धन महिला को शिव और पार्वती के आशीर्वाद दिए जाने की कथा है। एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण का परिवार रहता था। उसकी पत्नी बहुत धार्मिक और अपने पति के प्रति समर्पित थी। एक बार सावन महीने में तीज का त्यौहार आया। उसने सोचा कि वो व्रत कर भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करेगी किन्तु उसके घर पर खाने के लिए कुछ भी न था वो बहुत परेशान थी। तो भी उसने सोचा चाहे कुछ भी हो जाए वो भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करके व्रत रहेगी। वो अपनी पड़ोस में रहनी वाली महिला के पास गई वहां से उसने सत्तू , गेंहू और गुड़ उधार लिया। पूरा दिन निर्जला व्रत रखकर शाम को भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा की।
पूजा के पश्चात् उसने सत्तू का भोग चढ़ाया फिर उस प्रसाद को उसने और उसके पति ने खाया। महिला की भक्ति और पति के प्रति समर्पण को देख कर भगवान अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने महिला को आशीर्वाद दिया कि उसके घर में कभी भी अन्न की कमी नहीं रहेगी और उसका दाम्पत्य जीवन सुखमय रहेगा। बस यहीं से ये मान्यता हो गयी कि कजरी तीज का श्रध्दा पूर्वक व्रत करने और भगवान् की पूजा करने से परिवार में दरिद्रता नहीं आएगी, केवल समृद्धि होगी और दाम्पत्य जीवन भी सुखमय होगा। उसके बाद से सभी स्त्रियां कजरी तीज में विश्वास रखने लगीं और भगवान् का श्रद्धा पूर्वक पूजन करने के साथ व्रत भी करती हैं।
