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April 19, 2026
धर्म

Lord Hanuman Facts: हनुमान जी को दिया था श्री राम ने मृत्युदंड! जानें हनुमान जी से जुड़ी ऐसी 10 रोचक बातें

Lord Hanuman Facts: हनुमान जी को दिया था श्री राम ने मृत्युदंड! जानें हनुमान जी से जुड़ी ऐसी 10 रोचक बातें

हनुमान वो देवता हैं जो इस कलयुग में हम सभी के बीच सशरीर मौजूद हैं। अमरता का यह वरदान उन्हें प्रभु श्री राम से मिला, और आज भक्तों के बीच संकटमोचक बनकर वे सबकी रक्षा करते हैं। श्री राम की कृपा पानी हो या श्री कृष्ण का मन जीतना हो, इसका रास्ता हनुमान जी की सेवा से होकर जाता है। हम में से बहुत से लोग हनुमान जी के भक्त तो होंगे पर मुश्किल ही उनसे जुड़ी ये 10 रोचक बातें जानते होंगे। 

भगवान शिव के अवतार हैं हनुमान जी 

हनुमान जी की माता अंजना भगवान शिव की परम भक्त थीं। माता अंजना की भक्ति देखकर उन्हें भगवान शिव से यह वरदान मिला था कि वे उनके गर्भ से पुत्र के रूप में जन्म लेंगे। इसके कुछ दिनों के बाद राजा दशरथ के पुत्रोष्टि यज्ञ में जब उनकी रानियों को खीर दी गई तो वायु देव की सहायता से खीर का एक हिस्सा माता अंजना को भी मिला। माता ने इसे भगवान शिव का प्रसाद समझकर ग्रहण किया और इसके बाद हनुमान जी का जन्म हुआ था। 

यम तक को नहीं आने दिया प्रभु श्री राम के पास 

उत्तरकांड और अन्य पुराणों में इस भावनात्मक प्रसंग का उल्लेख है, जब स्वयं मृत्यु के देवता श्री राम को लेने धरती पर आए तो हनुमान जी ने उन्हें निकट जाने से रोक दिया था। श्री राम ने छल से हनुमान को अपनी अंगूठी ढूंढने को कहा और इस तरह भगवान ने अपने इस अवतार का अंत किया। 

प्रभु श्री राम से हनुमान का वादा 

जब प्रभु श्री राम का वैकुंठ धाम लौटने का वक्त आया तो उन्होंने अपने अभी भक्तों को अपने साथ चलने के लिए कहा, पर हनुमान जी ने इससे मन कर दिया। उन्होंने कहा कि स्वर्ग में जाने से अच्छा वे धरती पर राम नाम का जप करना पसंद करेंगे। इस तरह संकटमोचक के रूप में हनुमान जी ने श्री राम के भक्तों के बीच रहने के विकल्प चुना और उन्हें चिरंजीवी होने का वरदान मिला। 

हनुमान और भीम भाई-भाई थे 

वैसे तो हनुमान जी भगवान शिव का अंश है पर उनका जन्म वायु देवता के आशीर्वाद से हुआ था। इसी तरह कुंती ने जब वायु देवता का आह्वान किया था तब भीम का जन्म हुआ। पवन देवता की संतान होने की वजह से हनुमान और भीम में सगे भाइयों का संबंध है। इसका एक प्रसंग महाभारत में भी है जब गंधमादन पर्वत पर भीम संजीवनी बूटी लेने गए थे तो उनका अपने बड़े भाई हनुमान से मिलन हुआ था। 

माता सीता का उपहार किया था अस्वीकार 

प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक के बाद माता सीता ने हनुमान जी को मोतियों का हार भेंट में दिया। परन्तु उस हार के एक भी मोती में प्रभु राम की छवि न मिलने कारण वो भेंट स्वीकार न कर सके। इसके बाद हनुमान जी ने अपना हृदय चीरकर दिखाया था जहां उनके प्रभु वास करते हैं। 

बजरंगबली पुकारे जाने के पीछे कहानी 

माता सीता को सिंदूर लगाते देख जब हनुमान जी ने उनसे सिंदूर लगाने की वजह पूछी तो माता सीता ने कहा कि प्रभु श्री राम की लंबी उम्र के लिए वे ऐसा करती हैं। फिर क्या, भक्त हनुमान ने अपने प्रभु की दीर्घ आयु के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। तब से उनका नाम बजरंगबली पड़ा क्योंकि सिंदूर का दूसरा नाम बजरंग है। 

हनुमान जी ने भी लिखी थी रामायण 

लंका पर विजय प्राप्त कर और श्री राम के राज्याभिषेक के पश्चात हनुमान जी हिमालय पर्वत पर तपस्या के लिए गए थे। वहां उन्होंने चट्टानों पर रामायण की कहानी को अपने नाखूनों से उकेरा था। जब महर्षि वाल्मीकि ने यह सब देखा तो उन्हें अपनी लिखी रामायण कमतर लगी। हनुमान जी ने उनकी स्थिति भांप ली और अपनी लिखी रामायण को मिटा दिया। 

ब्रह्मचारी होने के बावजूद पिता थे हनुमान 

यह जानकर आपको जरूर हैरानी हो सकती है लेकिन ब्रह्मचारी हनुमान जी का एक पुत्र था जिसका नाम मकरध्वज था। मछली के पेट से जन्म के कारण यह नाम पड़ा। इसके पीछे की कहानी यह है कि जब पूरी लंका को जलाने के बाद वे अपनी पूंछ पर लगी आग बुझाने नदी पर पहुंचे तो उनके पसीने को मछली ने निगल लिया। इसके बाद ही मकरध्वज का जन्म हुआ था। 

प्रभु श्री राम ने हनुमान जी को दिया था मृत्यु दंड 

नारद जी का कहा मानते हुए जब हनुमान जी ने विश्वामित्र की छोड़कर सभी संतों का स्वागत किया तो इससे प्रभु श्री राम के गुरु क्रोध में आ गए। इसपर उन्होंने प्रभु श्री राम को यह आदेश दिया कि हनुमान को मृत्यु दंड दिया जाए। श्री राम अपने गुरु का कहा टाल न सके और हनुमान जी पर बाणों की बौछार कर डाली। पर हनुमान जी की भक्ति में इतनी शक्ति थी कि एक भी बाण उनका बाल भी बांका नहीं कर सका। इसके बाद ब्रह्मास्त्र उनपर छोड़ा गया पर वो भी राम नाम के जप के आगे कुछ न कर पाया। इस तरह हनुमान जी के प्राणों की रक्षा हुई। 

यहां रहते हैं हनुमान 

ऐसा कहा जाता है कि हनुमान जी जिन्हें एक कल्प तक इस पृथ्वी पर रहने का वरदान मिला है, यहां नेपाल तिब्बत सीमा के निकट गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं। 

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