April 14, 2026
धर्ममंदिर दर्शन

रुद्रनाथ : भगवान शिव के मुख दर्शन होते हैं यहां, ट्रेक पर जाते समय ध्यान रखें 5 बातें

Rudranath temple story

देवभूमि उत्तराखंड में रुद्रनाथ मंदिर चौथा केदार है, जहां भगवान शिव के मुख के दर्शन किए जाते हैं। यह मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है और इसके निकट पाण्डव, माता कुंती और द्रौपदी को समर्पित मंदिर भी हैं। यह स्थान समुद्र तल से करीब 11,800 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है। चलिए जानते हैं रुद्रनाथ मंदिर की पौराणिक कहानी के बारे में।

रुद्रनाथ मंदिर से जुड़ी पौराणिक कहानियां

पांडवों से जुड़ी कहानी

ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने करवाया था। इसी वजह से यहां मंदिर में भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव, द्रौपदी और माता कुंती की प्रतिमा भी विराजमान है। जब भगवान शिव महाभारत युद्ध से नाराज़ पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे, तो भोलेनाथ बैल का भेष धारण कर हिमालय चले गए। पांडवों ने भी शिवजी का पीछा किया और उनके बैल रूपी दिव्य स्वरूप को पहचान लिया। यह देख बैल जमीन में समाने लगे और इस तरह उनके पांच हिस्से हुए जिनमें से चौथा हिस्सा रुद्रनाथ में मुख के रूप में विराजमान है।

अंधकासुर दैत्य की कहानी

रुद्रनाथ मंदिर की दूसरी कहानी अधंकासुर से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार देवताओं ने अंधकासुर दैत्य के अत्याचारों से परेशान होकर इससे मुक्ति के लिए भगवान शिव की यहां आराधना की थी। इसके बाद भगवान शिव ने देवताओं को दैत्य के आतंक से मुक्ति का वचन दिया था।

रुद्रनाथ मंदिर कब खुलता है?

मई से अक्टूबर तक इस मंदिर के दर्शन करने जा सकते हैं, यानी साल में सिर्फ 6 महीने यह खुला रहता है। सर्दियों के मौसम में भारी बर्फबारी के चलते इसके कपाट बंद रहते हैं।

रुद्रनाथ ट्रेक जाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखें?

  1. रुद्रनाथ ट्रेक 30 किलोमीटर की पैदल यात्रा है, यह सामान्य से थोड़ी कठिन है क्योंकि ट्रेक की सीधी और खड़ी चढ़ाई मुश्किल है, इसलिए सेहत को ध्यान में रखते हुए यहां जाने का प्लान करें।
  2. अपने साथ सर्दी ज़ुकाम की दवा, पेनकिलर, उल्टी व दस्त की दवा, ORS अवश्य रखें।
  3. अगर आपको सांस लेने में परेशानी होती है तो डॉक्टर की सलाह के पश्चात ही यहां का प्लान करें। छोटी मोटी सांस की समस्या के लिए अपने साथ कपूर रखा जा सकता है।
  4. सर्दी और बारिश से बचाव के लिए अपने साथ गर्म कपड़े व रेनकोट रखें। ट्रेकिंग शूज़ आपके सफर को आसान बना सकते हैं।
  5. एक मजबूत और टिकाऊ बैकपैक, स्लीपिंग बैग, पानी की बोतल और ऊर्जा देने वाले स्नैक्स अपने साथ रखें।

Related posts

Kajari Teej Katha 2025: जानिए क्या कहती है कजरी तीज की कथा

Srishti Mishra

केदारनाथ : पौराणिक कहानी और यात्रा में ध्यान वाली 8 ज़रूरी बातें

Shweta Chauhan

वर्ण व्यवस्था : समाज में इससे जुड़े मिथक और वास्तविकता

Shweta Chauhan

Leave a Comment