सोशल मीडिया के इस दौर में हम कई सारी खूबसूरत जगहों को न केवल देख सकते हैं बल्कि यहाँ घूमने के लिए इनके बारे में जानकारी भी हासिल कर सकते हैं। ऐसी कई जगहें हैं जहां जाने का ख्वाब हर व्यक्ति देखता ही है। कोई मुन्नार का कायल है तो किसी को गोवा के बीच लुभाते हैं। इसी तरह हर व्यक्ति किसी न किसी जगह से जुड़ा होता है। फिर हर ट्रेवलर चाहता है कि वो अपनी मन पसंद सब जगह घूम ले। ये जगहें जिनसे हमारा मन जुड़ा होता है ये आम नहीं होती उनमें कुछ न कुछ खास बात जरूर होती है जो इन्हें खास बनाती है।
फिर जगहों से जुड़ी कहानियाँ भी वहाँ जाने पर मजबूर कर देती हैं। जैसे आप किसी खूबसूरत जगह घूमने जाते हैं ये कोई प्रसिद्ध मंदिर हो सकता है जो कहीं पहाड़ों में हो या फिर राजस्थान का कोई खूबसूरत महल। यहाँ से जुड़ी कहानियाँ हम जरूर जानना चाहते हैं। इसी तरह कई खूबसूरत जगहें हैं जिनके बारे में आप भी जरूर जानना चाहेंगे । तो चलिए जानते हैं ऐसी ही एक खूबसूरत जगह के बारे में जहां आप भी जीवन में एक बार तो जाना चाहेंगे ही। ये खूबसूरत जगह है ‘वैली ऑफ फ्लॉवर्स’, जी हाँ फूलों की वही खूबसूरत भ्यूंडार घाटी जिसे देख आपका मन भी कई बार वहाँ जाने का किया होगा।
भ्यूंडार घाटी
ये खूबसूरत फूलों की घाटी किसे मदहोश न कर दे। ये खूबसूरत जगह उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित है। इन खूबसूरत फूलों को देखकर लगता ही नहीं कि सच भी है बल्कि ये किसी सपने की तरह लगता है। ये घाटी इतनी खूबसूरत है कि लोगों का ये भी मानना है कि इस घाटी की रक्षा स्वयं नंदा देवी करती हैं। घाटी को ईश्वरीय आशीर्वाद से सम्पूर्ण और सुरक्षित भी माना जाता है। भ्यूंडार घाटी ट्रेक बेहद खूबसूरत ट्रेक है। ये ट्रेक 35 से 38 किलोमीटर का है। इस खूबसूरत फूलों की घाटी को घूमने का बेहतर समय मानसून का समय है। फूलों की अलग अलग प्रजातियाँ यहाँ पाई जाती है और मॉनसून में ये सभी खिल उठते हैं जिससे घाटी की सुंदरता और बढ़ जाती है। यहाँ ऐल्पाइन फूलों की सुंदरता देखते ही बनती है।
पौराणिक मान्यता
पौराणिक कथाओं में भ्यूंडार घाटी का उल्लेख है , कहा गया है कि हनुमान संजीवनी बूटी के लिए यहीं आए थे जिससे उन्होंने लक्ष्मण की जान बचाई थी। इस घाटी को नंदा देवी से भी जोड़ा जाता है। वहाँ के लोगों का मानना है कि ये घाटी माँ नंदा की देखरेख में है। यही कारण है यहाँ बहुत समय से ऋषि , संत आते हैं क्योंकि वे इस घाटी को दैवीय ऊर्जा से सम्पूर्ण पाते हैं। ये घाटी सिर्फ़ ट्रेक के लिए खूबसूरत ही नहीं है बल्कि ये एक आध्यात्मिक जगह भी है जहां की ऊर्जा आपको ताज़ा कर देती है।
जब रास्ता भटकने पर घाटी पहुंचे फ्रांसिस सिडनी स्माइथ
भ्यूंडार घाटी फ्रांसिस सिडनी से भी जुड़ी हुई है। फ्रांसिस सिडनी स्माइथ जो कि एक पर्वतारोही थे वे अपने साथी पर्वतारोही के साथ माउंट कामेट की ट्रेक से लौटते समय रास्ता भटक गए थे और वे रास्ता भटककर भ्यूंडार घाटी में आ पँहुचे थे। फिर उन्होंने बाद में 1938 में एक पुस्तक ‘वैली ऑफ फ्लावर्स’ के नाम से लिखी इसमें उन्होंने घाटी के बारे में बताया, इसके बाद से हम इस घाटी को ‘वैली ऑफ फ्लावर्स’ के नाम से भी जानते हैं। 1982 में इस क्षेत्र को भारत का राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। यहाँ अंग्रेजी वनस्पति वैज्ञानिक लेडी जोआन मार्गरेट लेगे का स्मारक भी है। फ्रांसिस की किताब को पढ़कर वो प्रेरित हुई और घाटी में घूमने के लिए आईं । वे शोध के लिए अल्पाइन के नमूने एकत्र कर रही थी जिस दौरान उनकी मौत हो गई। फिर बाद में उनका स्मारक बनवाया गया। इस तरह ये घाटी कई किस्सों से जुड़ गई। घाटी की खूबसूरती देखते ही बनती है। किसी को ये घाटी खूबसूरत फूलों की वजह से अच्छी लगती है तो किसी को यहाँ आध्यात्मिक अनुभव मिलता है। अगर आप भी खूबसूरत जगहों पर घूमना पसंद करते हैं तो ‘वैली ऑफ फ्लावर्स’ आपके लिए बेहद यादगार साबित होगी।