पंजाब , जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश , उत्तरकाशी, देवप्रयाग और छत्तीसगढ़ से जो तस्वीरें और विडिओ सामने आ रहे हैं वो डरा देने वाले हैं । कहीं बाढ़ में इंसान बह गए तो कहीं मवेशी भी बाढ़ में बह गए हैं । ये सब इतना डरा देने वाला है कि एक पल को लगता है जैसे सभी कुछ बह जाएगा। ये देखने भर से किसी का भी दिल दहल उठे। हर साल पानी का इतना विकराल रूप होना बहुत खतरनाक बात है। इस साल प्रकृति अपने और भी ज़्यादा विकराल रूप में है।
कहीं बादल फटने की समस्या देखने को मिल रही है तो कहीं नदियों का जल तीव्रता से बढ़ रहा है। क्या इसका अंत होगा या फिर हर साल लोगों को इस भयानक दृश्य के लिए तैयार रहना होगा। पहाड़ी इलाक़ों में बादल का फटना गहरे संकट पैदा करता है। पहाड़ी इलाक़ों में बादल के फटने का कारण क्या है और ये डरावने हालात भविष्य में भी रहेंगे या नहीं या फिर कई शहर जलमग्न हो जाएंगे ? आईए जानते हैं कि इन सवालों के जवाब ।
जब सब कुछ होता रहा जलमग्न
सोशल मीडिया पर हिमाचल प्रदेश, पंजाब , जम्मू , छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड से जो तस्वीरें और विडिओ वायरल हो रहे हैं वो काफी डरा देने वाले हैं। सभी कुछ जलमग्न हो गया है। यमुना नदी ,तवी नदी , सतलुज , चिनाब जैसी कई नदियों में बाढ़ आ गई है । जिससे सब कुछ तहस नहस हो गया है। पहाड़ों में पेड़ों का कटना और पहाड़ काटने के कारण ऐसे हालात पैदा हो रहे हैं । ग्लोबल वार्मिंग के कारण वातावरण में नमी बढ़ती है, जिसके कारण भारी बारिश होती है । बढ़ता तापमान भी समस्या पैदा करता है । लेकिन नदियों में बढ़ता पानी के स्तर के लिए सिर्फ बारिश ज़िम्मेदार नहीं है बल्कि ग्लेशियरों के पिघलने के कारण भी नदियों में पानी बढ़ रहा है और बाढ़ के हालात पैदा हो रहे हैं।
पहाड़ों में बादल फटने की समस्या
इस वर्ष पहाड़ों में बादल फटने की समस्या बढ़ गई है। आखिर पहाड़ों में बादल क्यों फटते हैं ? इसका कारण है कि पहाड़ नमी से भरी हवा को तेज़ी से ऊपर की ओर उठाते हैं । जिसके कारण अचानक ठंड और संघनन होता है। जब नमी सहित गर्म हवा ऊंचाई पर ठंडी हवा से मिलती है तो ये तेज़ी से गर्म से ठंडे में बदलने लगती है और तेज़ बारिश के हालत पैदा होते हैं ।
भविष्य में रहेंगे कैसे हालात
लगातार ग्लेशियरों का पिघलना हमारे लिए काफी खतरनाक साबित हो रहा है और आगे भी हो सकता है। पहाड़ों में पेड़ों की कटाई भी ऐसे हालात पैदा करती है जिससे ग्लोबल वार्मिंग में बढ़ोतरी हो रही है। पुराने पेड़ों को बचे रखना और इसके साथ ही नए पेड़ लगाना इस संकट को थोड़ा कम कर सकता है लेकिन अगर पेड़ों की कटाई को नहीं रोका गया तो हमें भविष्य में इससे भी भयानक हालातों का सामना करना पड़ेगा।