तारक मेहता का उल्टा चश्मा एक ऐसा शो जिसे बच्चे से बूढ़े तक सभी लोग देखना पसंद करते हैं। वैसे तो दयाबेन के जाने के बाद इस शो की पॉपुलैरिटी पर अच्छा खासा नकारात्मक असर पड़ा है। फिर और भी कई कारणों से ये हर दिन चर्चा का विषय भी रहा, पर यह आज का हमारा विषय नहीं है। हम आज बात करने वाले हैं इस शो से जुड़ी उन बारीक अच्छी और बुरी बातों के बारे में, जो देखने में भले ही मामूली लगे पर दर्शकों की मानसिकता पर एक गहरा असर डालती हैं। तो चलिए तैयार हो जाइए उन बातों को जानने के लिए जिनपर कभी आपका भी ध्यान नहीं गया होगा शायद!
तारक मेहता शो से जुड़ी 15 अच्छी बातें

सबका मिल-जुल कर रहना
इस शो की सबसे बड़ी खासियत है सोसायटी के सभी लोगों का मिल जुल कर रहना। कितना भी बड़ा झगड़ा या गलतफहमी हो, उसे बातचीत से सुलझाकर फिर से एक साथ हो जाते हैं गोकुलधाम वाले।
सभी त्योहारों को बराबर का महत्व
गोकुलधाम में गुजराती, पंजाबी, मराठी, बंगाली, मलयाली, बिहारी और अब तो राजस्थानी सब तरह का कल्चर देखने को मिलता है। सभी त्योहारों को बराबर महत्व देते हुए बड़ी धूम-धाम से मनाते हैं।
भारत की क्षेत्रीय संस्कृति को बढ़ावा
यह शो भारत की क्षेत्रीय संस्कृति को बढ़ावा देने में मदद कर रहा है। जहां एक तरफ भारत में कई अलग-अलग संस्कृति के लोगों में झगड़े और वैमनस्य की भावना देखने को मिल रही है, वहीं यह शो सीख देता है कि एकता ही सब कुछ है।
सामाजिक संदेश देने में सबसे आगे
वो चुनाव का मुद्दा हो, शिक्षा का मुद्दा हो या इंसानियत का, यह शो सामाजिक संदेश में सबसे आगे है। इसके हर एक एपिसोड में बड़ी ही आसानी से यह झलक देखी जा सकती है। मज़ाकिया स्वाभाव में दर्शकों को पाठ पढ़ाना तो कोई इस शो से सीखे।
भिड़े और जेठालाल की तकरार कभी नफरत में नहीं बदली
भिड़े और जेठालाल में कभी नहीं बनती, दोनों ही सैद्धांतिक स्तर पर एक अलग सोच रखते हैं। एक व्यापारी बुद्धि तो दूसरे के लिए शिक्षा ही सब कुछ। हर बार एक बड़ा झगड़ा और एक दूसरे को दोष देने के बाद आखिर में उस रिश्ते का फिर से सामान्य हो जाना, यही तो एक पड़ोसी और दोस्ती का धर्म है।
बबिता का फिटनेस पर ध्यान देना
गोकुलधाम में बबीता एक ऐसा किरदार है जो हमेशा एक्सरसाइज़ करती देखी जाती है। जाने अनजाने में ही सही, पर यह किरदार फिटनेस कितनी ज़रूरी है, इसके महत्व को दिखाती है।
अंजली की सेहत के प्रति जागरूकता
अंजली अपने पति तारक मेहता की डाइट के लिए जितनी सख्त दिखाई गई, काश हर महिला ऐसी होती तो आज डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों का भारत में हब नहीं होता।

भिड़े का अनुशासन और नियमों को महत्व देना
गोकुलधाम सोसाइटी का एकमेव सेक्रेटरी आत्माराम तुकाराम भिड़े अनुशासन और नियमों से चलने वाला किरदार है। हां, भले ही सोसायटी के बाकी लोग उसका मज़ाक उड़ाएं पर अगर भिड़े न हो तो मैनेजमेंट की धज्जियां ही उड़ जाएं।
डॉक्टर हाथी पॉजिटिविटी की चाबी
कभी अपने गौर किया कि डॉक्टर हाथी को हंसते हुए देखकर कोई भी व्यक्ति पॉजिटिव हो सकता है। हमेशा हंसते खिलखिलाते डॉक्टर हाथी के लिए हर मर्ज़ की दवा ही यही है। क्यों सही कहा न?
नट्टू काका और बाघा एक भरोसेमंद कर्मचारी
हम अक्सर अपने लिए काम करने वाले कर्मचारी या निचले स्तर के लोगों को संदेह की नज़र से देखते हैं। इस शो में नट्टू काका और बाघा के कैरेक्टर ने बताया है कि लोग भरोसेमंद भी होते हैं, जिनके मन में आपके लिए कोई बुराई या चोर नहीं।
जेठालाल एक दिलदार दोस्त
जेठालाल को हर बार यह कहते सुनेंगे कि आपको मैं अपनी दुकान से माल भाव-टू-भाव दूंगा! कभी देखा है किसी का इतना दिलदार दोस्त? अगर नहीं तो जेठालाल से इंस्पिरेशन लेना तो बनता है।
माधवी आत्मनिर्भर महिला की पहचान
महिला मंडली में माधवी अकेली ऐसी महिला है जिसका अपना बिज़नेस है। हाउसमेकर होने के साथ अपना बिज़नेस बखूबी कैसे संभाला जाता है, माधवी के किरदार ने हमें सिखाया है।
बबिता मॉडर्न पर कोई ईगो नहीं
बबिता की फिटनेस के अलावा एक और गुण भी है जो उसे खास बनाता है, वो है सबसे मॉडर्न होने के बावजूद कोई ईगो न होना। वरना आजकल के लोग दूसरों से थोड़े बेहतर और हटके क्या हुए, ईगो इतना कि हाथ ही जोड़ लिए जाएं।
लव मैरिज अच्छी भी होती है
मिस्टर और मिसेज़ सोढ़ी की लवी डवी बातें, किसी को भी रोमांटिक कर देंगी। सोढ़ी का रोशन की हर बात मानना और थोड़ा झुककर रहना गुलामी थोड़ी न है, वह तो सम्मान और प्यार है अपनी पत्नी के प्रति।
तारक मेहता शो से जुड़ी 15 बुरी बातें

जेठालाल का दयाबेन को ‘पागल औरत’ कहना
जेठालाल के इस डायलॉग को बवाल के चलते बैन कर दिया गया था। एक पॉडकास्ट में दिलीप जोशी ने बताया था कि ये डायलॉग उनकी स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं था, ये अचानक से निकला था जिसपर वहां महिलाओं ने आपत्ति जताई थी। इसके अलावा भी जेठालाल का दया को कई मौकों पर डांट देना और उसे भोला, कमतर और अनपढ़ दिखाना भी एक अच्छी सोच का हिस्सा नहीं है।
अय्यर के काले रंग का मज़ाक उड़ाया जाना
साउथ इंडियन अय्यर को इडली डोसा कहना, या उनके कालेपन का मज़ाक उड़ाना कहीं से भी हेल्दी नहीं है। यह समाज में गोरे और काले की मानसिकता को बढ़ावा देता है, जबकि हमें तो इस आधुनिक समाज में रेसिज्म के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।
मोटाए-पतला होना एक मज़ाक का विषय
मोटापा आजकल एक बड़ी समस्या बन चुका है जिसका समाधान गंभीरता से किया जाना चाहिए। पर इस शो में मोटापे को मज़ाक के तौर पर दिखाया गया है, अति में खाना और फिर वजन बढ़ाना, उसपर सब लोगों का मज़ाक भी उड़ाया जाना! यहां तो बॉडी पॉजिटिविटी की धज्जियां उड़ गई हैं।
भिड़े का घर का काम करना शर्म की बात
भिड़े का साड़ी इस्त्री करना, घर के काम में माधवी की मदद करना हमेशा पुरुष मंडली के बीच हास्य का विषय होता है। अब इस माइंडसेट के साथ हम एक मॉडर्न दुनिया की कल्पना तो नहीं कर सकते जिसमें पुरुष इस बात के लिए शर्म महसूस करे कि उसने घर का काम किया है।
अब्दुल सारे काम करता है बस सोसाइटी में नहीं रहता
अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में अब्दुल का किरदार बड़ा ही सहज और सरल है। लेकिन यह बात मुझे बड़ी खलती है कि वह सोसाइटी का हिस्सा न होते हुए भी सारे काम करता है, जैसे एकमेव सेक्रेटरी उसे तनख्वाह देते हो।
पोपटलाल का अकेलापन एक परेशानी
शादी ज़िंदगी का अंतिम लक्ष्य नहीं है पर पोपटलाल की ज़िंदगी मानो इसके बिना थम सी गई है। उसका अकेलापन उसको काटने दौड़ता है, जबकि यह ट्रांसफॉर्मेशन और खुद से प्यार करना भी सिखाता है। यह दर्शकों को संदेश देता है कि चाहे जो हो जाए शादी करना बहुत जरूरी है, मेरा सवाल है क्यों?
महिला मंडल का हाउस मेकर होना
इस शो की एक और सबसे बुरी बात यह है कि सभी महिलाएं सोसायटी में रहती हैं और पुरुष लोग काम पर जाते हैं। माधवी का अपना बिज़नेस है लेकिन उसकी डिलीवरी से कॉल रिसीविंग तक सारा काम भिड़े के हाथ में है। वैसे तो यह एक संतुलन की तरह दिखाया गया है लेकिन ऐसा भी क्या संतुलन जिसमें हाउसमेकर सिर्फ महिलाएं हों?

बापूजी का जरूरत से ज्यादा आदर्शवादी होना
आदर्शवाद की सारी सीमाएं बापूजी के विचारों ने लांघ दी हैं, अति आदर्शवाद लिए बापूजी जैसे लोग इस देश में तो क्या दुनिया में ही एक्जिस्ट नहीं करते हैं। कभी कभी शो देखने पर लगता है यह कोई काल्पनिक दुनिया के लोग हैं।
सोढ़ी की पार्टी शार्टी वाली खराब छवि
एक सरदार जी और शराब को लेकर लोगों के मन में जो इमेज बनी हुई है, वो सोढ़ी की पार्टी शार्टी की वजह से एकदम मजबूत हो जाती है। हमें चाहिए कि इस तरह की मानसिकता को तोड़ा जाए, यहां इसके उलट उसे बढ़ावा दिया जा रहा है।
टपुसेना एक सुपरहीरो
टपुसेना न हो गई जैसे कोई शक्तिमान, बड़े से बड़े चोर को पकड़ना हो या सोसाइट की कोई परेशानी हल करनी हो, इनका दिमाग रॉकेट साइंस की गति से चलता है। बच्चे कहां अपनी मस्ती और खेल की दुनिया में मग्न रहते हैं, जबकि यहां के बच्चे पुलिस के साथ मिलकर केस सॉल्व करवाते हैं। मुझे ये भी बड़ा इमेजिनरी लगता है।
जेठालाल का बबिता से फ्लर्ट करना
जेठालाल कोई भी मौका नहीं छोड़ता बबिता जी से फ्लर्ट करने का और बबिता जी इस बात से बेखबर भी हैं। इसके अलावा, सोसायटी में मेहता साहब के अलावा सभी लोग जेठालाल की इस नीयत से अनजान हैं। इससे हम क्या सीखें? कि एक शादीशुदा मर्द का दूसरी औरत पर निगाह रखना जायज़ है?
ज्ञान का ठेका तारक मेहता
सोसायटी में एक साइंटिस्ट है, एक पत्रकार है, एक शिक्षक है, एक डॉक्टर है, एक व्यापारी है पर सारा ज्ञान तारक मेहता को है। बाकी सब एकदम भोले और अनपढ़ से लगते हैं जब भी कहीं समझदारी की आती है। एक लेखक को दुनियादारी की समझ होती है पर इतनी भी नहीं कि और लोग उनके सामने कुछ न हों।
