जन्माष्टमी वो पर्व है जब भगवान कृष्ण को 56 प्रकार के भोग परोसे जाते हैं, यह भक्तों का प्रेम ही है जो भोग के माध्यम से भगवान तक पहुंचता है। पर कभी ऐसा मन में आया है कि 10 या 20 नहीं, 56 प्रकार के भोग ही क्यों भगवान को चढ़ाए जाते हैं? तो इसके लिए एक नहीं बल्कि कई पौराणिक कहानियां हैं जिनके बारे में आज हम बाते करने वाले हैं।
भगवान इंद्र का प्रकोप और गोवर्धन पर्वत की कहानी
छप्पन भोग से जुड़ी इस पौराणिक कथा के अनुसार एक बार सभी ब्रजवासी अच्छी फसल के लिए भगवान इंद्र को प्रसन्न करने में जुटे थे तब श्री कृष्ण ने सभी से कहा कि इंद्र देव की नहीं बल्कि गोवर्धन पर्वत की पूजा की जानी चाहिए। यही वो पर्वत है जिससे सभी को फल-सब्जियां और जानवरों को चारा मिलता है। ब्रजवासियों को श्री कृष्ण की यह बात ठीक लगी और उन्होंने वैसा ही करना शुरू कर दिया। यह सब देख इंद्र देव को बहुत क्रोध आया और पूरे ब्रज में भयंकर वर्षा के साथ बाढ़ आने लगी। इस संकट से सभी को बचाने के लिए भगवान कृष्ण ने एक उंगली से पूरा गोवर्धन पर्वत उठा लिया और ब्रजवासियों को उस पर्वत के नीचे लाकर रक्षा की। पूरे सात दिन भगवान यह पर्वत उठाए रहे वो भी बिना अन्न ग्रहण किए। इसके बाद अगले सात दिनों तक सभी ने दिन में आठ बार नए नए पकवान बनाकर खिलाए थे। तभी से छप्पन भोग प्रभु को अर्पित किया जाता रहा है।
सखियां हैं ये 56 भोग
पौराणिक कथाओं पर ऐसी मान्यता है कि गोलोक में भगवान कृष्ण श्री राधा रानी के साथ एक कमल पर विराजमान हैं। यह कमल 3 परतों वाला है जिसमें पहली परत पर 8, दूसरी पर 16 और तीसरी पर 32 पाखुंडियां हैं। हर एक पंखुड़ी पर एक सखी विराजमान हैं और कुल मिलाकर ये 56 सखियां हैं जिन्हें 56 भोग चढ़ाया जाता है।
श्री कृष्ण को गोपियों ने भेंट किए थे 56 भोग
श्रीमद्भागवत कथा के अनुसार गोपियों ने श्री कृष्ण को अपने पति के रूप में पाने के लिए यमुना में स्नान कर मां कात्यायनी की श्रद्धा से पूजा अर्चना की थी। उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाने पर उद्यापन के रूप में इन गोपियों ने भगवान कृष्ण को 56 भोग अर्पित किए थे। तब से कान्हा छप्पन भोग चढ़ाए जाने की मान्यता चली आ रही है।
किन चीज़ों को शामिल किया जाता है 56 भोग में?
दाल, चावल, चटनी, कढ़ी, शरबत, मुरब्बा, घेवर, फेनी, जलेबी, मालपुआ, खीर, दही, मक्खन, मलाई, सौंफ, रसगुल्ला, पापड़, लड्डू, साग, फल, सुपारी, सिखरन, बाटी, बड़ा, मठरी, खजला, चोला, पूरी, अधानो अचार, दलिया, घी, रबड़ी, इलायची, तांबूल, लवण, कषाय, अम्ल, मधुर, कटु, लस्सी, सुवत, मोहन भोग, तिक्त, शक्तिका, थूली, परिखा, खुरमा, मेसू, मोठ, महारायता, पगी, बिलसारू, लांगपुरी, शर्करा युक्त, शाक की कढ़ी।
