April 16, 2026
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सिर्फ मूंछों के चक्कर में बने थे पंकज धीर ‘कर्ण’, वो किस्सा जिससे मिली पहचान

pankaj dheer karn role

एक्टर पंकज धीर का नाम सुनकर सबसे पहले मन में जो छवि बनती है वो दानवीर कर्ण की है क्योंकि बीआर चोपड़ा की महाभारत में इसी किरदार से उन्हें घर-घर में लोकप्रियता मिली थी। अफसोस की बात यह कि आज यह दिग्गज कलाकार हमारे बीच नहीं रहे। आज हम उनकी याद में दानवीर कर्ण के महाभारत में रोल से जुड़े एक किस्से की बात करेंगे जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

महाभारत में पंकज धीर बनने वाले थे अर्जुन!

महाभारत में सबसे पहले अर्जुन के किरदार के लिए पंकज धीर को चुना जाना था और उन्हें डॉक्टर राही मासूम रजा और पंडित नरेंद्र शर्मा जी ने इस रोल के लिए पसंद किया था। इस रोल के ऑफर से पंकज बहुत खुश थे लेकिन जब उन्होंने बी आर चोपड़ा की शर्त सुनी थी तो साफ इनकार कर दिया। दरअसल बी आर चोपड़ा चाहते थे कि अर्जुन के किरदार के लिए पंकज धीर अपनी मूंछें कटवा लें, पर पंकज धीर ने इसके लिए मन कर दिया। एक्टर ने जवाब में कहा था कि ‘मेरे चेहरे का संतुलन कुछ इस प्रकार है कि अगर मैंने अपनी मूंछ हटा दी तो चेहरा अच्छा नहीं लगेगा।’

गुस्से में बी आर चोपड़ा ने पंकज धीर को दिखा दिया था बाहर का रास्ता

एक्टर का यह जवाब सुनकर बी आर चोपड़ा भड़क उठे और उन्होंने कहा कि ‘तुम एक्टर हो या क्या, एक रोल के लिए अपनी मूंछ तक नहीं हटा सकते’! गुस्से में उन्होंने पंकज को ऑफिस से जाने और यहां कभी न आने तक की बात कह दी थी।

बी आर चोपड़ा ने दोबारा किया था पंकज धीर को फोन

इस घटना के कुछ दिन बाद बी आर चोपड़ा ने एक बार फिर पंकज धीर को याद किया, अर्जुन के रोल के बजाय उन्होंने एक्टर को कर्ण का रोल ऑफर किया। तब भी एक्टर ने पहला सवाल यही पूछा था कि ‘इसके लिए मूंछ तो नहीं हटानी होंगी?’ जवाब में ना सुनकर आखिरकार पंकज धीर महाभारत में दानवीर कर्ण का किरदार निभाने के लिए तैयार हो गए।

कर्ण के बारे में कुछ नहीं जानते थे पंकज धीर

एक एक्टर केवल एक्टिंग करना जानता है और किरदार को खुद में आत्मसात कर लेता है, कुछ ऐसा ही पंकज धीर ने भी किया था। ऐसा इसलिए क्योंकि कर्ण के रोल से पहले उन्हें इसके बारे में कुछ भी नहीं मालूम था, बिल्कुल वैसे जैसे कोई शहरी लड़का इस बात से बिल्कुल अनजान होता है। उसपर महाभारत के डायलॉग्स भी इतने कठिन।

अपनी इस कमी को ताकत बनाने के लिए उन्होंने डॉक्टर राही मासूम रज़ा के सुझाव पर रामधारी सिंह दिनकर जी की रश्मिरथी और शिवाजी सावंत की मृत्युंजय नामक दो किताबें पढ़ी थी। साथ ही साथ रोजाना अखबार पढ़ने से भी उन्हें बड़ी मदद मिली थी। इसके बाद पंकज धीर ने कर्ण के किरदार से दर्शकों का दिल जीत लिया। आज भी ग्रामीण इलाकों में बहुत से लोग उनका असली नाम कम और कर्ण के नाम से ही जानते हैं।

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