Kahani : काश तुम सुन सकती!!

Kahani : काश तुम मुझे सुन सकती!!

आज एक हफ्ता बीत गया और मैं तुम्हें भूल नहीं पा रही। मुझे अच्छी तरह याद है जब मैं तुमसे पहली बार मिली थी। कॉलेज से आते हुए मैंने तुम्हें पहली बार देखा और मुझसे रहा न गया मैंने तुम्हें गोद में उठा लिया और घर ले आई…. । अपनी पालतू बिल्ली रानी की फोटो को हाथ में लिए सोनाक्षी उससे बातें कर रही थी। सोना कहाँ खो गई तुम ? माँ ने पूछा। सोनाक्षी ने कहा कुछ नहीं माँ बस यूँही रानी याद आ गई। इतना कहकर सोना रोने लगी और माँ के गले लग गई।  शायद ममता यही है किसी अबोध के मन में भी और बहुत सयाने मन में भी घूँघट डाले बैठी रहती है जैसे ही ये अपना घूँघट हटाती है तो उतने क्षण के लिए सारी दुनिया का दुख खत्म होता नज़र आता है जैसे सारी दुनिया में प्यार ही प्यार है। 

आज ऐसा ही कुछ सोनाक्षी ने महसूस किया। माँ ने बड़ी ममता से सोना के आँसू पोंछते हुए कहा ‘बेटी तूने अपना फ़र्ज़ निभाया, अगर तू उसके मालिक के पास उसे नहीं जाने देती तो सोच तुझे ज़िंदगी भर इसका मलाल रहता। फिर तूने उसे अच्छी ज़िंदगी देने की कोशिश की है सब अच्छा ही होगा’। 

आज पूरा एक हफ़्ता बीत चुका है लेकिन रानी की कोई खबर नहीं । सोनाक्षी को कॉलेज से वापस घर आते हुए उसे एक छोटी बिल्ली मिली थी। बिल्ली बहुत ज़ख्मी थी जैसे उसे किसी ने बहुत ज़ोर से मारा हो। उसकी आँख ज़ख्मी थी। सोनाक्षी ने उसे अपने हाथ में लिया पुचकारा अगले ही पल बिल्ली म्याऊँ म्याऊँ करती हुई उसकी गोद में सुरक्षित महसूस करने लगी। सोनाक्षी उसे घर ले आई । माँ देखिए मैं किसे लाई हूं … , अरे ये क्या ये बिल्ली कहाँ से मिली तुम्हें , ये तो ज़ख्मी है बेटा रुको मैं देखती हूं कुछ मरहम इसे लगा देती हूं । हाँ माँ मरहम लगा देना लेकिन पहले दूध ले आओ बहुत भूखी है बेचारी । 

सोनाक्षी ने बिल्ली का नाम ‘रानी’ रखा और माँ भी अब बिल्ली को रानी कहकर पुकारने लगी थी। सोनाक्षी के प्रेम ने बिल्ली के ज़ख्म भर दिए थे । सच ही कहा गया है प्यार हर ज़ख्म भर देता है। अब तो कॉलेज से घर लौटने पर सोनाक्षी को रानी का ही ध्यान रहता। सोनाक्षी के फर्स्ट ईयर के परीक्षा शुरू होने वाली थी। सोनाक्षी अपनी दोस्त ऋचा से असाइनमेंट लेने गई थी।  

अरे सोनाक्षी तुम आ गई?, हाँ मैं आ गई और पता है तुम्हें किसी से मिलवाने के लिए लाई हूं। मैं समझ गयी तू रानी को लेकर आई है न? दिखा मुझे… कितनी प्यारी है ये । म्याऊँ म्याऊँ करती हुई रानी, ऋचा की गोद में चली गई। चल अब मैं चलती हूं रानी को भी भूख लग रही होगी मैं इसे फिर लाऊँगी तेरे पास । पक्का न ? ऋचा ने पूछा । हाँ , मैं ज़रूर आऊँगी। सोनाक्षी रानी को लिए घर की ओर चल पड़ी।

अरे ये तो हमारी बिल्ली है इसे तो मैंने गुस्से में कॉलेज के पास छोड़ दिया था ये बिल्ली इसके पास क्या कर रही है शायद इस लड़की ने इसे अपने पास रख लिया है…, इसका पीछा करना होगा। दो लड़के आपस में बात कर रहे थे जिसे सोनाक्षी ने सुना नहीं। अगले दिन सोनाक्षी के घर के दरवाज़े पर दस्तक हुई। आप कौन ? हमारी बिल्ली वापस करो!! बिल्ली? मैं समझी नहीं आप क्या कह रहे हैं? सोनाक्षी की माँ ने घबराते हुए कहा। वही बिल्ली जिसे लेकर तुम्हारी बेटी यहाँ आई है। दोनों लड़कों ने कहा । तभी सोनाक्षी कॉलेज से वापस आ गई । आप लोग कौन हैं और क्या चाहिए आपको? सोनाक्षी ने पूछा , हमें हमारी बिल्ली चाहिए जिसे तुम कल लेकर आई हो। वो बिल्ली हमारी है खो गई थी। खो गई थी ? या तुमने उसे मारपीटकर निकाल दिया था । जब मुझे ये बिल्ली मिली तो मैंने खुद देखा था कि वो कितनी बुरी तरह ज़ख्मी थी। और अब तुम उसे लेने आए हो ?, मैं तुम्हें अपनी बिल्ली नहीं दूँगी । सुना तुमने ? सोनाक्षी गुस्से में चिल्लाई। सोनाक्षी बेहद परेशान थी एक तो पहले ही उसे अपनी परीक्षा की चिंता थी और अब कोई रानी को वापस ले जाने के लिए दरवाज़े पर था। रानी ने जैसे ही सोनाक्षी को देखा वो उससे लिपट गई और उन लड़कों को देखकर डर भी गई। वो लड़के डर गए और कहने लगे कि वो काफ़ी ज़िद्दी बिल्ली है इसलिए उसे हमने डराया था और वो भाग गई थी। 

सोनाक्षी की माँ झगड़ा झंझट नहीं चाहती थी क्योंकि वो अपनी बेटी के साथ इस शहर में अकेले रहा करती थी ऐसे में उन्हें डर था कि बात बढ़ न जाए और झगड़ा न हो जाए, तो उन्होंने सोनाक्षी को समझाया ‘ बेटी कोई बात नहीं , अगर ये उनकी बिल्ली है तो उन्हें दे देते हैं और ये लोग उसका ध्यान भी रखेंगे। ‘ये आप क्या बोल रही हो माँ आपने देखा था न कि उस दिन रानी कितनी ज़ख्मी थी’ सोनाक्षी रोते हुए कहने लगी। देखो बेटा ज़िद नहीं करते वो इसका पूरा ख्याल रखेंगे। इतना कहते ही लड़कों ने बिल्ली सोनाक्षी से छीन ली और उसे अपने साथ ले गए ।  

रानी चिल्लाने लगी, बार बार छटपटाने लगी जैसे कोई बच्चा अपनी माँ के लिए छटपटाता है। जैसे कोई बच्चा झुंड में भी अपनी माँ को पहचान लेता है। जिस तरह इस संसार का कोई भी प्राणी अपनी माँ के प्रेम से दूर नहीं होना चाहता उसी तरह आज रानी भी ऐसा नहीं चाहती थी। एक बच्चा जिसकी भाषा हम इंसान नहीं समझ सकते लेकिन तो भी वो हमें अपने प्रेम का एहसास करवा देता है, तभी तो आज सोनाक्षी का दिल भी तड़प रहा है रानी ने उसे प्रेम का एहसास करवा दिया था। 

आज रानी को घर से गए एक हफ़्ता हो गया है। माँ सोनाक्षी से माफ़ी मांगते हुए कहती हैं बेटी मुझमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि मैं उसे रोक पाती फिर शहर में हम अकेले हैं तो मुझे डर था कि हम किस किस से झगड़ा करते रहेंगे। ‘कोई बात नहीं माँ शायद हमारी किस्मत में रानी का इतना ही साथ था’ सोनाक्षी ने कहा। माँ और सोनाक्षी दोनों अपने अपने काम में लग गईं। अचानक दरवाज़े पर दस्तक हुई एक औरत की आवाज़ आई कोई है ? सोनाक्षी ने दरवाज़ा खोला और सामने पाया कि एक औरत अपने हाथ में सोना की प्यारी रानी को लिए खड़ी है,रानी बहुत कमज़ोर नज़र आ रही है। 

उस औरत ने कहा बेटी तुम ही रखो इस बिल्ली को मेरे बेटों को ये काटने दौड़ती है और इतने दिन से इसने कुछ खाया नहीं । ये बिल्ली मेरे बेटों को दिखी थी तो वो इसे घर ले आए थे लेकिन वो इसे तंग करते तो ये भाग गई थी फिर ये तुम्हें मिली लेकिन वो फिर इसे ले आए। मैं बहुत शर्मिंदा हूं कि उन्होंने तुमसे इसे छीन लिया। इस वजह से बिल्ली की तबीयत बिगड़ती चली गई। बिल्ली अभी तक सिर झुकाए थी सोनाक्षी ने उसे अपने हाथ में लिया रानी रानी कहकर पुकारा , रानी ने सोनाक्षी को देखा और धीरे से बोली ‘म्याऊँ म्याऊँ’ ! ये सुनते ही सोना ने बिल्ली को गले से लगा लिया और रोने लगी, ऐसा लगता था जैसे रानी अपनी भाषा में कह रही है कि ‘काश !! तुम उस दिन मुझे सुन सकती और न जाने देती तो मैं और तुम दोनों खुश होते’। सोनाक्षी की माँ ने औरत का धन्यवाद किया और कहा कि ‘ये अब हमारे घर की सदस्य है इसे लौटाकर अपने बहुत पुण्य का काम किया है। अगर इसे कुछ हो जाता तो मैं खुद को कभी माफ़ न कर पाती…। इतना कहकर सोनाक्षी की माँ रानी पर हाथ फेरकर रोने लगी। महिला ने अपने बच्चों के किये की माफ़ी मांगी और रानी को सोनाक्षी के हाथ सौंप कर चली गई। सोनाक्षी बहुत खुश थी और रो रही थी। ये खुशी बहुत कीमती होती है जब आप बेहद खुश हों और आपकी आँखें भर आयें। अगली सुबह हल्की धूप सोनाक्षी के चेहरे पर पड़ रही है, माँ उसे जगा रही हैं और रानी सोनाक्षी के हाथों से लिपट कर सो रही है। 

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